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Jhunjhunu, Rajasthan
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कर्म लौटकर अवश्य आते हैं
बहुत समय पहले की बात है।
एक समृद्ध नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी रहता था। उसका व्यापार दूर–दूर तक फैला हुआ था और लोग उसे एक सफल कारोबारी के रूप में जानते थे। वह नियमित रूप से अपने व्यापार में व्यस्त रहता और नगर के अनेक लोगों से उसका लेन–देन था।
उसी नगर के किनारे एक बूढ़ा व्यक्ति अपनी छोटी-सी झोपड़ी में रहता था।
वह सरल स्वभाव का, शांत और परिश्रमी था।
वह शुद्ध देसी घी बेचकर अपना जीवन यापन करता था—मंदिरों में और कुछ घरों में।
उस बूढ़े का एक नियम था—
वह हर रोज़ अपनी गाय के लिए 1 किलो गुड़ लेकर जाता था।
गाय उसके लिए केवल पशु नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य थी।
वह बूढ़ा भी हर सप्ताह उस व्यापारी को 5 किलो घी दिया करता था।
यह लेन-देन वर्षों से चला आ रहा था।
एक दिन व्यापारी के मन में शंका उत्पन्न हुई।
उसने सोचा—
“यह बूढ़ा अनपढ़ और गरीब है।
क्या भरोसा, पूरा घी देता भी है या नहीं?”
उसने तराजू निकाला और घी के पैकेट को तौला।
तौल देखकर उसका क्रोध भड़क उठा।
घी का वजन 5 किलो नहीं, बल्कि 4 किलो 500 ग्राम था।
अगले दिन व्यापारी ने बूढ़े को बुलाया।
बाज़ार के बीच सबके सामने वह चिल्लाने लगा—
“ओ धोखेबाज़!
तू इतने सालों से मुझे ठग रहा है?
5 किलो बोलकर हमेशा कम घी देता रहा!
आज के बाद मेरी दुकान पर मत आना।”
बूढ़ा व्यक्ति बिल्कुल शांत रहा।
उसने सिर झुकाया और विनम्र स्वर में बोला—
“साहब, मुझे क्षमा करें।
मैं बहुत गरीब हूँ।
मेरे पास तौलने के लिए बाट खरीदने के पैसे नहीं हैं।”
चारों ओर सन्नाटा छा गया।
बूढ़ा आगे बोला—
“मैं रोज़ आपकी ही दुकान से अपनी गाय के लिए 1 किलो गुड़ लेकर जाता हूँ।
वही गुड़ मैं तराजू के एक पलड़े में रख देता हूँ,
और दूसरे पलड़े में उतना ही घी तौल देता हूँ।”
व्यापारी को सच्चाई समझ आ गई।
जिस घी को वह कम समझ रहा था,
वह दरअसल उसके ही कर्मों का प्रतिफल था।
उसने कभी मिलावट नहीं की थी,
लेकिन कम तौल देना भी
अन्याय ही था—
और वही अन्याय उसे लौटकर मिल गया।
व्यापारी का सिर शर्म से झुक गया।
जिस बूढ़े को वह धोखेबाज़ समझ रहा था,
वह तो केवल उसके ही कर्मों का आईना था।
🕊️ दार्शनिक व्याख्या (Explanation)
यह कहानी हमें कर्म के तीन गहरे सत्य सिखाती है—
🌼 नीति (Moral)
जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।
इंसान के कर्म उसकी परछाईं की तरह
हर कदम पर उसके साथ चलते हैं।
यदि आप चाहते हैं कि जीवन में
आपको पूरा और न्यायपूर्ण मिले,
तो दूसरों को भी
पूरा और न्यायपूर्ण देना सीखिए।
क्योंकि आज का छोटा-सा अन्याय
कल की बड़ी सीख बन जाता है। 🌱🙏