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Jhunjhunu, Rajasthan
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अरण्यकाण्ड वाल्मीकि रामायण का तीसरा काण्ड है इसमें कुल 75 सर्ग तथा 2440 श्लोक है। अरण्यकाण्ड में भगवान् राम का माता सीता और लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में प्रवेश, विराध-वध, शरभङ्ग मुनिका ब्रह्मलोक-गमन, वानप्रस्थ मुनियों का राक्षसों के अत्याचार से रक्षा के लिए श्रीरामचन्द्रजी से प्रार्थना करना, सुतीक्ष्ण के आश्रम पर जाना, अगस्त्य मुनि की ओर से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति, जटायु से मिलना, गोदावरी नदी के तट पर पञ्चवटी में सुंदर पर्णकुटी का निर्माण, शूर्पणखा के नाक-कान काटना, खर, दूषण और त्रिशिरा सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध, सुवर्णमय मृगरूप मारीच का वध, रावण का साधु वेश धारण कर सीता का अपहरण, रावण द्वारा जटायु का वध, श्री राम का विलाप, जटायु का प्राण-त्याग और रामजी द्वारा उनका दाह-संस्कार, कबन्ध की आत्मकथा, उसका वध और दिव्य रूप की प्राप्ति, मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्य धाम को गमन और भगवान् राम का लक्ष्मण के साथ पम्पासरोवर के तट पर जाना आदि प्रसंग सम्मिलित किए गए हैं।